
1. पृष्ठभूमि
6 और 11 नवम्बर 2025 को आयोजित हुए 2025 Bihar Legislative Assembly election के मतदान परिणाम एतिहासिक रूप से सामने आ गए हैं। राज्य की 243 विधानसभा सीटों पर हुई इस चुनाव प्रक्रिया में मतदाताओं ने स्पष्ट संदेश दिया है कि उन्हें विकास-प्रगतिशील राजनीति तथा जनता-केंद्रित शासन चाहिए।
2. प्रमुख परिणाम एवं आंकड़े
- NDA (National Democratic Alliance) को प्रचण्ड जीत मिली है: Bharatiya Janata Party (BJP) ने 89 सीटें जीतीं।
- Janata Dal (United) (JD (U)) ने 85 सीटें जीतीं।
- Lok Janshakti Party (Ram Vilas) (LJP-RV) को 19 सीटें प्राप्त हुईं।
- ओपोजिशन की स्थिति: Rashtriya Janata Dal (RJD) ने लगभग 25 सीटें जीतीं।
- अन्य बड़ी पार्टियाँ: Indian National Congress (INC) ने तहत-अनुसार 6 सीटें जीतीं, All India Majlis‑e Ittehadul Muslimeen (AIMIM) को 5, Hindustani Awam Morcha (Secular) (HAM-S) को 5 सीटें मिलीं।
- समग्र रूप से, NDA ने 2025 में सरकार बनाने के लिए आवश्यक 122 सीटों की अधिकतम संख्या से कहीं ऊपर जाकर अपना वर्चस्व स्थापित किया।
3. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का संदेश
प्रधानमंत्री मोदी ने जनता को इस मतदान के लिए धन्यवाद देते हुए कहा है:
“बिहार के लोगों ने एक विकसित और समृद्ध राज्य के लिए फैसला किया है। आज महिला और युवा के लिए हमारी ‘MY (महिला+युवा)’ फॉर्मूला ने अपना प्रभाव दिखाया है। आपकी भरोसा मेरी प्रतिबद्धता है, आपकी आकांक्षा मेरी प्रेरणा है।”
उन्होंने आगे कहा:
“इस चुनाव में ‘अपमान’ या ‘अपील’ की राजनीति नहीं — बल्कि विकास-उन्मुख राजनीति ने बाजि मारी है। आज बिहार ने सार्वभौमिक संतुष्टि की राजनीति को चुन लिया है।”
4. विश्लेषण एवं महत्व
- इस नतीजे से स्पष्ट है कि बिहार के मतदाताओं ने विकास-आधारित एजेंडा को चुना है और राजनीतिक स्थिरता व कार्य-क्षमता को प्राथमिकता दी है।
- NDA की यह जीत केवल संख्या में नहीं बल्कि प्रतीकात्मक रूप से भी महत्वपूर्ण है: पहली बार BJP ही सबसे बड़ी पार्टी के रूप में उभरी है।
- विपक्ष के लिए यह एक महत्वपूर्ण संकेत है कि उन्हें अपनी रणनीति, जन संवाद और सामाजिक विविधता पर पुनर्विचार करना होगा।
- बिहार में अब विकास-प्रगति पर केन्द्रित सरकार की उम्मीद बन गई है, जो शिक्षा, स्वास्थ्य, बुनियादी ढाँचा, रोजगार जैसे क्षेत्रों को गति दे सकती है।
5. आगे की राह
- गठबंधन द्वारा शीघ्र ही नए मुख्यमंत्री का शपथ-समारोह आयोजित किया जाएगा और सरकार तेजी से काम शुरु करेगी।
- जनता को विश्वास होगा कि वादे केवल घोषणाएँ नहीं, बल्कि क्रियान्वित कार्यक्रम बनेंगे।
- मतदाताओं की उम्मीदों को साकार करने के लिए पारदर्शिता, जवाबदेही एवं जन-भागीदारी प्रमुख रहेंगे।
